हिंदी कविता (आदिकालीन एवं भक्तिकालीन) सहायिका/गीत/(1)काहे को ब्याही विदेश रे,लखि बाबुल मोरे।

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सन्दर्भ[सम्पादन]

प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि अमीर खुसरो द्वारा रचित हैं। यह उनके 'गीत' शीर्षक कविता से अवतरित हैं।

प्रसंग[सम्पादन]

इसमें कवि ने एक पुत्री का अपने पिता से उलाहना किया जा रहा है। वह अपने पिता के प्यार से इतनी जुड़ी हुई है कि वह उनका घर छोड़कर अपने साजन के साथ नहीं जाना चाहती है। उसे लगता है कि उसका सब कुछ पीछे छुट जाएगा क्योंकि उस घर से उसकी यादें जडी हुई हैं, जो उसे बाद में सताएँगीं। यही सोचकर वह अपने मन की पीड़ा एवं प्रेम की अभिव्यक्ति करती है। वह कहती है-

व्याख्या[सम्पादन]

सद्य ब्याहा लड़की अपने पिता से मीठी शिकायत करती है कि तुमने मुझे व्याह कर अर्थात् मेरी शादी कराकर परदेस क्यों भेज दिया है ? मैं तो तुम्हारे बागों की कोयल थीं जो पूरी तरह से खुश थी। मैं चारों तरफ़ इधर-उधर भागती-दौड़ती हुई कुछ-न-कुछ बोलती रहती थी। मैं वहाँ रहने वालों के घर-घर जाकर मनको खुश करती थी। और उन्हें भी खश करती थी। देख मेरे पिता तुमने यह क्या किया ? तुम्हारी भी देख-भाल करती थी। तुम्हें देखकर मैं हमेशा खश रहती थी। इतना ही नहीं मैं तो तुम्हारें खेतों में भी जाती रहती थी। उनकी देखभाल भी करती थी। मैं खेतों से दाने चुग कर ऊपर उड़ जाती थी। मैं तो तुम्हारे खेतों में फैली हुई बेले की कलियाँ थीं जो खिल-खिलाती रहती थी। जो तुम कुछ भी मांगते थे वह मैं तुम्हें लाकर देती थी।

इतना ही नहीं मैं तो तुम्हारे घर में खूटी से बंधी रहने वाली गाय थी। एक ही जगह पर खड़ी रहती थी। तुम जहां मुझे लाते-ले जाते थे चल देती थी। मैंने लाख की बनी गुड़िया को भी छोड दिया। सहेलियाँ भी छूट गयीं जिनके साथ मैं खेला करती थी। जिस दिन मेरी पालकी घर के नीचे से निकली थी, उस दिन मेरा विछोह देखकर तो मेरे भाई ने भी पछाड़ खाई थी। वह बेहोश हो गया था। वह बहुत रो रहा था। जब आम के पेड़ के नीचे से मेरी पालकी निकली थी तो कोयल ने मुझे पुकारा था। वह भी दुखी थी। अब तू क्यों रोती है ? हमारी कोइलिया? हम तो अब पराए हो गयी हैं। हम विदेश की हो गई हैं। तुम भी तो नंगे पैर मेरे पालकी के पीछे भागते हुए आ रहे थे। मेरा प्रिय! मेरी डोली लेकर जा रहा था। तुम उसे देख रहे थे।

विशेष[सम्पादन]

1. खड़ी बोली है।

2. रहस्य-भावना है।

3. अद्वैत-भावना है।

4. प्रसाद-गुण है।

5. बिंबात्मकता है।

6. लयात्मकता है।

7. गीत के सभी गुण विद्यमान हैं।

शब्दार्थ[सम्पादन]

काहे - क्यों । ब्याही - शादी की। विदेश - परदेश। लखि - देख। बाबुल - पिता। तोरे - तेरे। मोरे - मेरे। कुहकत - कुछ कहना, चहकना। चुग्गा-चुगत - दाना चुगना। गइया - गाय। सहेलियाँ - संगी-साथी ,दोस्त। छाडि - छोड़ना। तले - नीचे। रोवे - रोना भगत - भागना आवै - आना। साजन - प्रिय, पति।