हिंदी कविता (आधुनिक काल छायावाद तक) सहायिका/बालिका

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हिंदी कविता (आधुनिक काल छायावाद तक) सहायिका
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बालिका


संदर्भ

बालिका कविता सुप्रसिद्ध कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित हैं।यह बहुत समवेदंशिल स्वभाव की कवियित्री है। जिसे वह कविता के रूप में पन्नों पर उतर देती है।


प्रसंग

बालिका कविता में कवियित्री  एक बालिका का परिचय देते हुए बताती है कि किस प्रकार संतान प्राप्ति के बाद व्यक्ति के जीवन में सुविधा आ जाती है।


व्याख्या

कवियित्री जाती है यह बालिका मेरी गोद की शोभा है। यह मेरे सौभाग्य अर्थात् सुहाग की लालिमा है। यह मेरे लिए मेरी शान है। यह मेरे जैसी भिखारिन का राजसी रूप है। यह मेरी कामना के अनुसार इच्छा का परिमाण है। अर्थात् कवियित्री को अपनी पुत्री बहुत प्रिय है। उसके आने के बाद उसके जीवन में बहुत सारी खुशियां आ गई है। यह मेरे अंधकारमयी जीवन की ज्योति है जो मेरे जीवन को दीया दिखाकर प्रकाशमय करेगी। यह आसमान में घनघोर घटाओं में बिजली की तरह चमकेगी।जिस प्रकार सूर्योदय होने से पूर्व  चंद्रमा का उजाला चारो ओर होता है। उस समय भवरा कमल के चारो और मंडराता है। उसी प्रकार यह बालिका भी मेरे चारो ओर घूमती है। यह भी बालिका मेरे उजड़े हुए जीवन में वसंत का हरियाली के समान है। वह कहती है यह मेरे जीवन में अमृत का धारा बढ़ाने वाली हैं। यह मेरे साधना में मस्ती भर के मुझे तपस्पी बना दिया। यह मेरी लगन में मनस्वी की तरह है। यह कवियित्री के सच्चे मन से मनन करने साधना है। कवियित्री सोचती है कि यह वैसे की नटखटो की तरह खेलती है। जैसी कवियित्री बचपन में वो खेलती है। यह बागो में खिलने वाले फूल की तरह हंसती खेलती मुस्कुराती है। यह बालिका मेरे लिए मेरी मंदिर है मेरी मस्जिद है जो सुख काबा या काशी में जा कर मिलता है यह वही है। मुझे इस बालिका से मिलने के बाद सभी का आनंद मिलता है। यही मेरी पूजा है यह मेरा ध्यान जप और तप है। पूजा पाठ से जो शांति मुझे मिलती है वो शांति मुझे इस बालिका सेलती है। इस बालिका को आंगन में खेलते देखकर ऐसा लगता है मानो कृष्णाकीडा मेरे आंगन में हो रहा है। जो सुख कोशल्या को राम को देखने पर मिलता है वहीं सुख मुझे भी मिलता है। इससे मसीहा का क्षमा देने की प्रवृत्ति नबी मुहम्मद का विश्वास गौतम बुद्ध का आत्मचार पर विरोध यह सभी गुण मेरी पुत्री के पास विराजमान है। आपका मुझसे मेरी बेटी का परिचय पूछते है कि यह क्या है? यह सभी मानवीय गुणों से समृद्ध है। साक्षात गुणों की खान है। मुझे इस पर गर्व है। मै इसका परिचय केसे दू इसे सिर्फ वही समझ सकता है जिसका दिल मां का होगा जो संवेदना और उसकी गहराई को समझेगा।


विशेष

1) अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है।

2) माधुर्य गुण है।

3)भाषा सरल व सहज है।

4) उपमा अलंकार का प्रयोग है।

5)तत्सम शब्दों का प्रयोग है।

6) बिंबात्मकता, भावनात्मक विद्यमान हैं।

7)पुत्री के मिलने की अपार खुशी दिखाई गई है।