हिंदी कविता (छायावाद के बाद)/अकाल और उसके बाद

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हिंदी कविता (छायावाद के बाद)
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अकाल और उसके बाद
नागार्जुन

कई दिनों तक चूल्हा रोया चक्की रही उदास
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त
कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त

दानें आए घर के अन्दर कई दिनों के बाद
धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद
चमक उठीं घर-भर की आँखें कई दिनों के बाद
कौए ने खुजलाई पाँखे कई दिनों के बाद