हिंदी कविता (छायावाद के बाद)/मारे जाएंगे

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हिंदी कविता (छायावाद के बाद)
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मारे जाएंगे
राजेश जोशी

जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे
मारे जायेंगे।
कटघरे में खड़े कर दिये जायेंगे, जो विरोध में बोलेंगे।
जो सच सच बोलेंगे, मारे जाएंगे ।
बर्दाश्त नहीं किया जायेगा कि किसी की कमीज हो
"उनकी" कमीज से ज्यादा सफेद
कमीज पर जिनके दाग नहीं होंगे, मारे जायेंगे।

धकेल दिये जायेगें कला की दुनिया से बाहर, जो चारण नहीं
जो गुन नहीं गायेंगे, मारे जायेंगे
धर्म की ध्वजा उठाए जो नहीं जायेंगे जुलूस में
गोलियां भून डालेंगी उन्हें, काफिर करार दिए जायेंगे
सबसे बड़ा अपराध है इस समय
निहत्थे और निरपराध होना
अपराधी
मारे जायेंगे।