हिंदी कविता (छायावाद के बाद)/सांप

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हिंदी कविता (छायावाद के बाद)
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सांप
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय

सांप ! तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना भी तुम्हें नहीं आया

एक बात पूछूं - (उत्तर दोगे ?)
तब कैसे सीखा डसना - विष कहां पाया ?