हिंदी कविता (छायावाद के बाद) सहायिका/आदतों के बारे में

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हिंदी कविता (छायावाद के बाद) सहायिका
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संदर्भ[सम्पादन]

प्रस्तुत कविता'आदतों के बारे में'कवि 'राजेश जोशी' द्वारा रचित है।

प्रसंग[सम्पादन]

आदतें के बारे में' कविता मे कवि ने समाज की नई समस्याओं को 'मनुष्य की आदतें समाज की आलस्यता'और 'व्यावसायिक हिंसक गतिविधियों' से सामज के लोगों मे जागरूकता लाना चाहता है।

व्याख्या[सम्पादन]

मनुष्य की आदतें मनुष्य पर राज करती है तानाशाह जैसी मनुष्य अपनी आदतों का गुलाम बन जाता है, अर्थात् जो बुरी आदते है वह बड़ी कठिनाइयों से जाती हैं और अच्छी आदते बड़ी ही आसानी से छुट जाती हैं यह लगभग पालतु जानवर की तरह अपनी गिरफ्त मे मनुष्य को किए रखता है,अच्छी आदतों से बुरी आदतें बहुत देर तक आदमी पर डेरा जमा कर रखती है,कुछ इंसान तो ईश्वर से भिन्नः दिखने के लिए विशेष आदतें पाल लेते है,जब लोग कम आयु मे संपन(शिक्षा,धन,यश )होना चाहते है तो समाज मे नई आदतें जन्म लेती है, लोग अचानक कुहनी उठाकर चलना सिख जाते है ,कुहनी से धक्का देकर , लोगों एक , दूसरे को दबाकर आगे बढ़ना चाहते है,आगे निकलने की होङ मे हिंसा बन जाती एक आदत,इस हिंसा के शिकार सिर्फ स्त्रियां और बच्चे ही नहीं (युवा,बुजुर्ग, शिक्षित, अशिक्षित,ग्रामिण,शहरी)सभी वर्ग ह समाज मे दबे लोग कुहनी उठाकर (हत्यार बना)लेते है बिना दबे कोई हत्यारे नहीं बनता,हत्यारे मे जो चीजे सबसे पहले मरती है वह है इंसान की इंसानियत यह है कविता की सबसे जरूरी पंक्ति,अच्छी आदतों को डरपोक कहा गया है,कारण वह जल्दी लुप्त होती है समाज मे काम कराने के लिए जो अच्छी आदतों (सत्य का साथ लेता)का साथ लेता है उन्हें लोग अव्यवहरिक बुद्ध हीन कहते है काम निकालने वाले समाज मे,आदते बहुत आकर्षक होती है और उन आदतों को बनाए रखने के लिए सबसे ताकतवर तर्क कहा जाता है उनके बारे में,आदमी हमेशा सोचता है अपनी आदतो के बारे में जबकि जानकर उन्हें सिर्फ दोहराते हैं।

विशेष[सम्पादन]

विशेष

१- इस कविता के द्वारा कवि बताना चाहता है कि किस प्रकार मनुष्य बुरी आदतो की तरफ खींचा चला आता हैं बहुत से लोग सिर्फ दिखावे के लिए अच्छी आदते को अपनाते हैं

२- कवि समाज के लोगों को जागरूक कर रहा है

३- अलंकारों का सुंदर उपयोग हैं

४- समाज के हित की बात की जा रही है

५- शब्दों का बहुत सुंदर उपयोग है

६- छन्दो का भी प्रयोग है

७- शब्द सरल व सरस है

८- गाता गीत' में अनुप्रास अलंकार है।कविता पर प्रयोगवादी शैली का प्रभाव है इसमें तत्सम शब्दावली का प्रयोग हुआ है।

९- कवि ने अनेक उदाहरण देकर व्यक्ति की सत्ता का समाज में विलय आवश्यक बताया है।