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हिंदी पत्रकारिता/समाचार संकलन और विभिन्न स्रोत

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समाचार संकलन

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कोई भी व्यक्ति स्वाभाविक रूप से पूछ सकता है कि समाचार पत्र के लिए खबरें कहाँ से एकत्र हो जाती है? उसके संवाददाता खबरों को कहांँ से और किस तरह प्राप्त कर लेते हैं? इसका बड़ा सीधा और सटीक ‌उत्तर यह है- यदि समाचार विवेक हो तथा उन्हें संकलित करने की योग्यता या क्षमता तो समाचारों के अनगिनत स्त्रोत है।

इस संबंध में स्मरण योग्य बात है कि रिपोर्टर (संवाददाता/प्रतिनिधि/उप-संपादक) का परिश्रम, उनकी सूझ-बूझ, समाचार सूंघने, खोजने और समाचार का पीछा करने की प्रवृत्ति द्वारा विभिन्न स्त्रोतों तथा माध्यमों से सर्वसामान्य के लिए ज्ञातव्य विभिन्न सूचनाओं, तथ्यों, घटनाओं के विवरणों, भाषणों आदि में व्यक्त विचारों इत्यादि का विधिवत संग्रह (समाचार कथा के रूप में प्रकाशित करना) समाचार संकलन कहलाता है।

कई बार कोई संवाददाता समाचार की खोज में मारा-मारा फिरता है, फिर भी उसे कोई समाचार हाथ नहीं आता। जबकि कई बार अनायास ही राह चलते उसे कोई महत्वपूर्ण समाचार हस्तगत हो जाता है। परंतु यह निर्भर करता है कि आपके आँख, कान और नाक कितने सचेत और अनुभवी हैं।

बड़े समाचार पत्रों, आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए समाचारों का संकलन और आयोजन कोई एक व्यक्ति या संवाददाता नहीं करता। इस काम में पूरा समाचार संकलन अनुभाग या समाचार एकांश (News Unit) जुड़ा रहता है। समाचार संपादक या मुख्य संवाददाता की मेज पर या समाचार एकांश में समाचारों, प्रेस रिलीज, वक्तव्यों, भाषणों आदि अनेक चीजों का ढेर सा लगा रहता है। इस ढेर से छांटकर समाचारों को प्रकाशन के योग्य बनाना। किंतु कई बार उन समाचारों में दी गई सूचनाएं कई बार पर्याप्त नहीं होती/पुष्ट नहीं हुआ करती। ऐसे में समाचार प्रभाग को सर्वाधिक ध्यान समाचार स्त्रोतों देना होता है। इसके पश्चात उसकी‌ विश्वसनीयता और प्रमाणिकता की जांच होती है तदुपरांत फिर यह निर्णय लिया जाता है कि समाचार प्रकाशन या प्रसारण योग्य है अथवा नहीं।

समाचार स्रोत

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समाचार स्त्रोत वास्तव में भी स्थानीय केंद्र है जहाँ से समाचार प्राप्त होते हैं अथवा हो सकते हैं। विशिष्ट व्यक्ति, संस्था, अदालत, पुलिस स्टेशन, विधानसभा, सम्मेलन, समारोह, सार्वजनिक स्थल जैसे- मण्डी, रेलवे स्टेशन इत्यादि कुछ भी समाचार स्रोत हो सकते हैं।

उपलब्धता के आधार पर समाचार स्रोत निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं-

  1. प्रत्याशित स्त्रोत
  2. पूर्वानुमानित स्त्रोत
  3. अप्रत्याशित स्त्रोत

'प्रत्याशित स्त्रोत'वह है जहाँ से या जिनके माध्यम से समाचार विश्वसनीय ढंग से सहज ही उपलब्ध हो सके। पुलिस स्टेशन, नगरपालिका, अस्पताल, अदालत, विभिन्न समितियों तथा निगमों की बैठकें, संसद तथा विधानसभाओं के अधिवेशन, पत्रकार सम्मेलन, प्रेस विज्ञप्तियांँ इत्यादि समाचारों के प्रत्याशित स्त्रोत हैं।

'पूर्वानुमानित समाचार स्त्रोत' वे हैं, जिनसे पूर्व अनुमान लगाकर संवाददाता संपर्क करता है और तथ्य तथा समाचार प्राप्त करता है। इनमें संभावना के आधार पर अनुमानित समाचार ग्रहण किए जाते हैं। गंदी बस्तियों, शिक्षण संस्थानों, कल-कारखानों, कार्यालयों के कामकाज की शैली इत्यादि के संदर्भ में पहले से ही अनुमान लगा कर समाचारों की खोज में निकला जा सकता है।

'अप्रत्याशित स्रोत' वे है जो किसी संवाददाता या संपादक को अचानक अप्रत्याशित रूप में उपलब्ध हो जाते हैं। कई बार समाचार पत्र कार्यालय में अचानक टेलीफोन आ जाते हैं और उनके माध्यम से अप्रत्याशित समाचार मिल जाते हैं। लेकिन ऐसे समाचारों की विश्वसनीयता तथा प्रामाणिकता को परखने के बाद ही समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाता है। इस प्रकार के समाचार प्रायः कम ही प्रकाशित होते हैं क्योंकि इनका कोई ठोस आधार (स्त्रोत) नहीं होता है।