हिंदी भाषा और संप्रेषण/व्यावसायिक संप्रेषण की विशेषता

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व्यावसायिक संप्रेषण में निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिए- १. स्पष्टता- संप्रेषण में विचारों की स्पष्टता होनी चाहिए। स्पष्ट विचार ही स्पष्ट भाषा और स्पष्ट संदेश के निर्माण में तथा उनके संप्रेषण में सहायक होते हैं।

२. आवश्यकतानुरूप - संप्परेषण योक्ता की आवश्यकता के अनुरूप होना चाहिए। यह संप्रेषण में प्राप्तकर्ता की आवश्यकता को ध्यान में नहीं रखा जाएगा तो प्राप्तकर्ता संदेष प्राप्त करने में रुचि नहीं लेगा। इससे संप्रेषण की प्रक्रिया अपूर्ण रह जाएगी। इसलिए अच्छे संप्रेषण की यह अनिवार्य विशेषता होती है कि वह श्रोताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप होता है।

३. स्वर, भाषा तथा हावभाव की समरूपता- अच्छे संप्रेषण में संदेश तथा प्रेषक की भाषा, भाव एवं मुद्रा की समरूपता होती है।

४. उपयोगी- संप्रेषण प्राप्तकर्ता के लिए उपयोगी होता है। उदाहरण के लिए किसी वस्त्र सीने वाली कंपनी में दर्जी से किए गए संप्रेषण में प्रेषक द्वारा उनके लिए उपयोगी बातों मसलन सिलाई, मसीन, वेतन, भावी योजनाएं, विकास के अवसर आदि विषयों में से कुछ को संदेश में जरूर शामिल करता है। यदि संदेश पूर्णतः स्रोताओं के लिए अनुपयोगी होगा तो उसका प्रभाव क्षीण हो जाता है।

५. प्रतिपुष्टी - प्रभावी संप्रेषण में फीडबैक के लिए जरूर ही स्थान होता है। श्रोताओं की प्रतिपुष्टि के बिना संप्रेषण की प्रक्रिया अधूरी तथा अपूर्ण होती है। इसलिए वर्तमान दौर में प्रायः सभी तरह के संप्रेषण में प्रत्यक्ष या परोक्ष प्रतिपुष्टि की व्यवस्था की जाती है।

६. समन्वय- प्रभावी संप्रेषण में क तथा प्राप्तकर्ता में तालमेल होता है। श्रोता प्रेषक तथा संदेश की पृष्ठभूमि से परिचित होता है इससे वह प्रेषक के संदेश को सही स्वरूप में ग्रहण कर पाता है।