पर्यावरणीय भूगोल/अवधारणा एवं क्षेत्र

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पर्यावरणीय भूगोल
अवधारणा एवं क्षेत्र मानव पर्यावरण संबंध → 

पर्यावरण भूगोल की अवधारणाएं[सम्पादन]

पर्यावरण भूगोल (अंग्रेजी: Environmental geography) पर्यावरणीय दशाओं, उनकी कार्यशीलता और तकनीकी रूप से सबल आर्थिक मानव और पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्यययन स्थानिक तथा कालिक (spatio-temporal) सन्दर्भों में करता है।[१] पर्यावरण भूगोल भूगोल की शाखाओं में से एक है, यह मानव और प्राकृतिक प्रणालियों के बीच संबंधों का अध्ययन करता है। भूगोल कि यह शाखा एक प्रकार से भौतिक भूगोल और मानव भूगोल के विभाजन और बढ़ती दूरियों को कम करने का कार्य करती है। भूगोल सदैव ही मानव और उसके पर्यावरण का अध्ययन स्थान के सन्दर्भों में करता रहा है ।भूगोल सदैव ही मानव और उसके पर्यावरण का अध्ययन स्थान के सन्दर्भों में करता रहा है लेकिन 1950-1970 के बीच भौतिक भूगोल और मानव भूगोल के बीच बढती दूरियों ने इसे पर्यावरण के अध्ययन से विमुख कर दिया था। बाद में तंत्र विश्लेषण और पारिस्थितिकीय उपागम के बढ़ते महत्व को भूगोल में तेजी से स्वीकृति मिली और पर्यावरण भूगोल, भौतिक और मानव भूगोल के बीच एक बहुआयामी संश्लेषण के रूप में उभरा।[२]

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पर्यावरण शब्द परि+आवरण के संयोग से बना है। 'परि' का आशय चारों ओर तथा 'आवरण' का आशय परिवेश है। के. हेविट और एफ. के. हरे ने सबसे पहले 'पर्यावरण भूगोल' शब्द का प्रयोग किया था, उन्होंने टिप्पणी की कि आज पर्यावरण भूगोल की मुख्य ज़रूरतें विचारों और जीवन विज्ञान के परिणामों का गहरा संलयन हैं। वनस्पतियों, जीवों,और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं । वास्तव में, पर्यावरण में वायु,जल,भूमि,पेड़-पौधे, जीव-जन्तु,मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता हैं। पारिस्थितिकी और भूगोल में यह शब्द अंग्रेजी के environment के पर्याय के रूप में इस्तेमाल होता है। अंग्रेजी शब्द environment स्वयं उपरोक्त पारिस्थितिकी के अर्थ में काफ़ी बाद में प्रयुक्त हुआ और यह शुरूआती दौर में आसपास की सामान्य दशाओं के लिये प्रयुक्त होता था। यह फ़्रांसीसी भाषा से उद्भूत है जहाँ यह "state of being environed" (see environ + ment) के अर्थ में प्रयुक्त होता था और इसका पहला ज्ञात प्रयोग कार्लाइल द्वारा जर्मन शब्द Umgebung के अर्थ को फ्रांसीसी में व्यक्त करने के लिये हुआ।
कुछ महत्वपूर्ण परिभाषा:-
प्रो. जे. स्मिथ (J. smith) के अनुसार, भौतिक, रासायनिक तथा जैविक दशाओं का योग, जो एक जीव द्वारा अनुभव किया जाता है। इसमें जलवायु, मृदा, जल, प्रकाश, निकटवर्ती वनस्पति, व्यक्तिगत तथा अन्य प्रजातियां सम्मिलित हैं।
डी. एच. डेविड (D. H. David) के अनुसारपर्यावरण का अभिप्राय भूमि या मानव के चारों ओर से घेरे हुए उन सभी भौतिक स्वरूपों से है, जिनमें न केवल वह रहता है। अपितु जिनका प्रभाव उसकी आदतों एवं क्रियाओं पर भी स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है।
ए. गाउडी (A. Goudie) ने अपनी पुस्तक The Nature of Environment में पृथ्वी के भौतिक घटकों को ही पर्यावरण का प्रतिनिधि माना है तथा उनके अनुसार पर्यावरण को प्रभावित करने में मानव एक महत्वपूर्ण कारक है।
पर्यावरणीय भूगोल को जीवित एवं गैर-जीवित जीवों एवं प्राकृतिक पर्यावरण के बीच तकनीकी रूप से उन्नत आर्थिक व्यक्ति और विशेष रूप से अस्थाई और स्थाई ढांचे में उनके प्राकृतिक वातावरण के बीच अंतर्संबंधों के स्थानिक गुणों के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।मानव हस्तक्षेप के आधार पर पर्यावरण को दो प्रखण्डों में विभाजित किया जाता है - प्राकृतिक या नैसर्गिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण। हालाँकि पूर्ण रूप से प्राकृतिक पर्यावरण (जिसमें मानव हस्तक्षेप बिल्कुल न हुआ हो) या पूर्ण रूपेण मानव निर्मित पर्यावरण (जिसमें सब कुछ मनुष्य निर्मित हो), कहीं नहीं पाए जाते। यह विभाजन प्राकृतिक प्रक्रियाओं और दशाओं में मानव हस्तक्षेप की मात्रा की अधिकता और न्यूनता का द्योतक मात्र है। पारिस्थितिकी और पर्यावरण भूगोल में प्राकृतिक पर्यावरण [३]शब्द का प्रयोग पर्यावास (habitat) के लिये भी होता है।अतः प्राकृतिक या भौतिक भूगोल और मानव भूगोल के मध्य समन्वय स्थापित करने और इनके बहु आयामी संश्लेषण के कारण पर्यावरण भूगोल को एक तीसरी नई शाखा के रूप में भी कुछ विद्वानों द्वारा देखा गया है।

पर्यावरण भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं चिन्तन का अभिन्न अंग रहा है। हमारे वेदों, पुराणों, पंचतंत्र व जातक कथाओं, उत्सवों, त्योहारों व संस्कारों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश गुंथा हुआ है, जिसे हमने पाश्चात्य भोगवादी संस्कृति केेेेेे प्रभाव में बिसरा दिया है। मनुष्य प्रकृति विजय का स्वप्न साकार करने की चेष्टा में भुला बैठा है कि वह भी प्रकृति पुत्र है। [४]आधुनिक युग में प्रकृति की अवमानना व पर्यावरण अवनयन का प्रतिफल वैश्विक तापन, प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि, ओजोन परत क्षरण, अम्लीय वर्षा, मरुस्थलीकरण इत्यादि रूपों में प्रकट हो रहा है। बढ़ते प्रदूषण के कारण हमारी आस्था व श्रद्धा की प्रतीक जीवनदायिनी नदियां मलवाही नालों में बदल रही हैं। प्राणवायु देने वाला वायुमण्डल दमघोटु हो गया है। इसके लिए शासन तंत्र की उदासीनता एवं आम नागरिक का पर्यावरण के प्रति कत्र्तव्यच्युत होना, समान रूप से उत्तरदायी है। हमारी नदियों, झीलों, पहाड़ियों, वन सम्पदा तथा वायुमण्डल का नैसर्गिक स्वरूप बचाने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सरकार को आदेश व निर्देश देने पड़े हैं। आज प्रत्येक स्तर पर औपचारिक व अनौपचारिक रूप में पर्यावरण शिक्षा की महती आवश्यकता है।

पर्यावरण भूगोल का विषयक्षेत्र[सम्पादन]

पृथ्वी के सतह, वायुमंडल और जलमंडल (या अन्य ग्रहों के अनुरूप भागों) में रहने वाले जीवों के कब्जे वाले क्षेत्र को जीवमंडल के रूप में जानते हैं। जीवमंडल व्यापक भू-तंत्र (पारिस्थितिकी तंत्र) है जो पर्यावरण भूगोल के अध्ययन के लिए स्थानिक इकाई के रूप में इसे शामिल किया जाता है।[५]

पर्यावरण भूगोल का मुख्य विषय यह है कि जैविक प्रक्रियाओं और मानव जिम्मेदारियों, मानव-पर्यावरण संबंधों के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर प्राकृतिक पर्यावरण के घटकों एवं उनके संबंध का अलग-अलग और साथ-साथ अध्ययन किया जाए।

पर्यावरणीय भूगोल को 5 प्रमुख उपक्षेत्रों में बांटा जा सकता है:-

  1. पर्यावरण का एक पारितंत्र के रूप में संगठन और उसकी कार्यशीलता,
  2. मानव-पारितंत्रीय संबंध विश्लेषण और पर्यावरणीय अवनयन
  3. पर्यावरणीय दशाओं और मानव-पर्यावरण संबंधों का स्थानिक संदर्भ में अध्ययन
  4. पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण प्रबन्धन से जुड़े स्थानिक पहलू
  5. भौगोलिक सूचना तंत्र और सुदूर संवेदन तकनीक का पर्यावरणीय अध्ययन में अनुप्रयोग कि दशा और दिशा निर्धारित करना है।

संबंधित प्रश्न[सम्पादन]

  1. पर्यावरण भूगोल के मुख्य उपागो को वर्णन किजीए।
  2. पर्यावरण भूगोल की अवधारणा पर चर्चा करें।
  3. पर्यावरणीय भूगोल को परिभाषित कीजिए तथा इसके विषय-क्षेत्र की व्याख्या करें।
  4. पर्यावरण की परिभाषा दीजिए। पर्यावरण भूगोल का वर्णन करते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डालिए।

सन्दर्भ[सम्पादन]

  1. William M. Marsh, Environmental Geography: Science, Land Use, and Earth Systems, John Wiley, 1996
  2. Noel Castree, David Demeritt, Diana Liverman, Bruce Rhoads; A Companion to Environmental Geography, John Wiley & Sons, (Google eBook)
  3. H. M. Saxena (2017). Environmental Geography. Rawat Publications. आइएसबीएन 978-81-316-0848-7.
  4. डॉ रतन जोशी,पर्यावरण भूगोल, साहित्य भवन पब्लिकेशन्स आगरा, ISBN 978-93-8979-715-2
  5. Savindra Singh (1991). Environmental Geography. Prayag Pustak Bhawan.