हिंदी साहित्य का इतिहास (रीतिकाल तक)/हिन्दी का प्रारम्भिक रूप

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हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति[सम्पादन]

हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति के संबंध में निम्नलिखित मत प्रचलित है। परंपरावादी संस्कृत पंडितों के अनुसार हिन्दी - हिन्द(नष्ट करना) + दु(दुष्ट) अर्थात् हिन्दू का अर्थात् हिन्दु का अर्थ है दुष्टों का विनाश करने वाला। इसके अतिरिक्त हिंदु की एक दूसरी व्युत्पत्ति हीन + दु (हीनो या दंडित करने वाला)। कुछ लोग इसे हीनता का दूलन करने वाला मानते हैं। आज का पढ़ा लिखा वर्ग इस शब्द को फ़ारसी शब्द हिन्दु से संबंधित मानता है। हिन्दु शब्द भी मूलतः फ़ारसी न होकर संस्कृत शब्द सिन्धु का फ़ारसी रूपांतरण है। डॉक्टर मोनीयर विलियम्स ने सिन्धु शब्द को सिंध धातु से निकला होने का अनुमान लगाते है। सिंधु शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ऋग्वेद में सामान्य रूप से नहीं तथा नदी के आसपास के प्रदेश के लिए हुआ है।

500 ई०पूर्व० के आसपास सिन्धु नदी का स्थानीय प्रदेश ईरानी लोगों के हाथ में था। संस्कृत के सिन्धु का ईरानी में हिंदु ही गया, जो सिन्धु के आसपास का प्रदेश में प्रयुक्त हुआ। कालांतर में आर्थिक विकास के साथ हिंदु का अर्थ भारत हो गया। इसमें ‘इ’ के बालाघाट के कारण अन्त्य ‘उ’ का लोप हो गया और हिन्दु से हिन्द बन गया।

भाषा के अर्थ में हिन्दी का विकास[सम्पादन]

भाषा के लिए हिन्दी शब्द का प्रयोग भी फारस और अरब से ही होता है। 6 वीं शताब्दी के ईसवी के कुछ पूर्व से ही ईरान में “जवान-ए-हिन्दी” प्रयोग भारत के भाषाओं के लिए होता रहा है। भारत के फ़ारसी कवि ऑफी ने सर्वप्रथम सन् 1228 ई० में “हिंदवी” का प्रयोग समस्त भारतीय भाषाओं के लिए न करके भारत की (संभवतः मध्य देश की) देशी भाषाओं के लिए किया।

डॉ धीरेन्द्र वर्मा द्वारा संपादित “हिन्दी साहित्य कोष - भाग 1” के अनुसार ‘13-14 वीं शती में देशी भाषा को हिन्दी या हिन्दकी या हिन्दुई नाम देने में अबुल हसन या अमीर खुसरों का नाम सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं। भारतवर्ष में भाषा के अर्थ में हिन्दी शब्द के प प्रयोग का प्रारंभ मुसलमानों द्वारा ही किया गया। भारतीय परंपरा में ‘प्रचलित भाषा’ के लिए प्राचीन काल से ही भाषा शब्द का प्रयोग होता आया है। इसका प्रयोग क्रम से संस्कृत, पालि, प्राकृत तथा बाद में हिन्दी आदि के लिए हुआ।

डॉ भोलानाथ तिवारी ने लिखा है कि -- खुसरो ने हिन्दी शब्द का प्रयोग भारतीय मुसलमानों के लिए किया है। और 'हिन्दवी' शब्द का मध्य 'देशी' भाषा के लिए। यह हिन्दवी शब्द वस्तुतः हिंदुई है, अर्थात् हिन्दुओं की भाषा। हिन्दुई शब्द के प्रयोग के कुछ दिन बाद हिन्दी की भाषा की लिए कदाचित ही दी शब्द चल पड़ा।

18 वीं शताब्दी तक हिन्दी मुसलमान की भाषा न रहकर हिन्दुओं की भाषा की ओर झुक रहा था। 19 वीं शती के मध्य के पूर्व तक हिन्दी का प्रयोग उर्दू या रेख़्ता के सामांनार्थी रूप से चल पड़ा। डॉ ग्राहमवेल तथा ताराचंद सबसे पुराना प्रयोग मुसहफी में मिलता है — खुदा रक्खे जबाँ हमनें सुनी है, मीरा-वो-मिर्ज़ा की, कहें किस मुंह से हम मुसहफ़ी उर्दू हमारी है।

रेख़्ता का फ़ारसी में अर्थ ' गिरा हुआ ' या गिरकर बनाया हुआ देर है। रेख़्ता नाम 18 वीं शताब्दी से प्रारंभ होकर 19 वीं शती के मध्य तक उर्दू के लिए चलता रहा।

आधुनिक अर्थ में व्यापक प्रयोग का क्षेत्र मूलतः अंग्रेज़ी को है। 1800 ई० में कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना हुई। वहां गिल्क्राइस्ट हिन्दी या हिन्दुस्तानी के अध्यापक नियुक्त हुए। यदि गिलक्राइस्ट ने मध्यदेश की वास्तविक प्रतिनिधि भाषा को जो न तो अधिक अरबी - फ़ारसी की ओर झुकी हुई थी और न ही संस्कृत की ओर, अपनाया होता और, तो आज हिन्दी - उर्दू नाम की दो भाषाएं न होती और हिन्दी भाषा और उसके साहित्य का नक्शा इस तरह नहीं होता।

हिन्दी का नवीन अर्थ में लिखित प्रयोग सर्वप्रथम कैप्टन टेलन ने सन् 1812 ई० में फोर्ट विलियम कॉलेज के वार्षिक विवरण में किया।

वर्तमान में हिन्दी शब्द मुख्यतः निम्न अर्थों में प्रयुक्त ही रहा है — (१) हिन्दी साहित्य के इतिहास ग्रंथों में हिन्दी का अर्थ है हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा बिहार की भाषा।

(२) वर्तमान भारतीय साहित्य में हिन्दी शब्द भारतीय संघ की राजभाषा (देवनागरी लिपि में हिन्दी होगी - भारतीय संविधान अनुच्छेद ३४३) तथा राष्ट्रभाषा के नाम का देयोतक।