हिंदी साहित्य का इतिहास (रीतिकाल तक)

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साहित्य के इतिहास में साहित्य के परिवर्तन और विकास की व्याख्या होती है। १००० ईस्वी के आस-पास हिंदी साहित्य के इतिहास का आरंभ माना जाता है। कालक्रम की दृष्टि से हिंदी साहित्य का विभाजन चार कालों - आदि, पूर्व-मध्य या भक्ति, उत्तर-मध्य या रीति और आधुनिक में किया जाता है। यहाँ हम हिंदी साहित्य के उत्तर-मध्य या रीतिकाल तक का इतिहास पढ़ेंगे। इसके पश्चात आधुनिककालीन हिंदी साहित्य का इतिहास आरंभ होता है। यह पाठ्य-पुस्तक पश्चिम बंग राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के स्नातक हिंदी (प्रतिष्ठा) के तृतीय सत्रार्द्ध के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर बनाई गई है। अन्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थी भी सामग्री से लाभान्वित हो सकते हैं।

विषय सूची

  1. हिन्दी भाषा के विकास की पूर्व पीठिका
  2. भारोपीय भाषा परिवार और आर्य भाषाएँ (संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश आदि का सामान्य परिचय)
  3. हिन्दी का प्रारम्भिक रूप
  4. हिन्दी का विकास (आदिकाल, मध्यकाल, आधुनिककाल)
  5. हिन्दी भाषा : क्षेत्र और बोलियाँ
  6. साहित्येतिहास एवं इतिहास दर्शन
  7. हिंदी साहित्येतिहास लेखन की परंपरा
  8. साहित्येतिहास लेखन में काल विभाजन की आवश्यकता
  9. हिंदी साहित्येतिहास लेखन में काल विभाजन की समस्या
  10. हिंदी साहित्य : काल विभाजन और नामकरण
  11. आदिकाल की परिस्थितियाँ
  12. सिद्ध, नाथ और जैन साहित्य का परिचय और महत्व
  13. अमीर खुसरो और विद्यापति का साहित्यिक महत्व
  14. रासो काव्य परम्परा
  15. भक्ति का उदय
  16. भक्ति आंदोलन और उसका अखिल भारतीय स्वरूप
  17. भक्तिकाल के विभिन्न संप्रदाय और उनके आचार्य
  18. भक्ति साहित्य की दार्शनिक पृष्ठभूमि
  19. भक्तिकाल की विविध धाराएं और उसकी विशेषताएँ : संत काव्य
  20. भक्तिकाल की विविध धाराएं और उसकी विशेषताएँ : प्रेमाश्रयी काव्यधारा
  21. भक्तिकाल की विविध धाराएं और उसकी विशेषताएँ : कृष्ण काव्य
  22. भक्तिकाल की विविध धाराएं और उसकी विशेषताएँ : राम काव्य
  23. भक्तिकालीन प्रमुख कवि और उनके काव्य
  24. रीतिकाल की प्रमुख परिस्थितियाँ
  25. रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ
  26. रीतिबद्ध काव्यधारा
  27. रीतिसिद्ध काव्यधारा
  28. रीतिमुक्त काव्यधारा
  29. रीतिबद्ध, रीतिमुक्त एवं रीतिसिद्ध धारा के कवियों का परिचय
  30. रीत्येतर साहित्य : रीतिकालीन वीरकाव्य, भक्तिकाव्य, नीतिकाव्य