हिंदी साहित्य का सरल इतिहास/अन्य कृष्ण भक्त कवि

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राधा-वल्लभी संप्रदाय के प्रवर्तक हितहरिवंश का उल्लेख और थोड़ा परिचय भक्तिकाल के प्रारंभ में ही दिया जा चुका है। इनका जन्म 1502 में हुआ था। इनका रचनाकाल सन् 1543 से 1583 तक माना जाता है। इन्होंने 1525 मं श्रीराधावल्लभ की मूर्ति वृंदावन में स्थापित की। ये संस्कृत के विद्वान थे इन्होंने संस्कृत में भी अत्यंत सरस रचना की है। हितचौरासी में इनकी कविताएँ संकलित हैं। हितहरिवंश द्वारा प्रवर्तित संप्रदाय में राधा की भक्ति की प्रधानता है। इसमें विधि-निषेध का त्याग है। हितहरिवंश ने राधा-विषयक अत्यंत सरस रचनाएँ की हैं। इनकी रचनाएँ कम संख्या में उपलब्ध हैं ।