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सामान्य अध्ययन २०१९/महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्धान

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सामान्य अध्ययन २०१९
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  • इस्लामिक सहयोग संगठन (Organisation for Islamic Cooperation- OIC) द्वारा भारत में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम,2019 और सर्वोच्च न्यायालय के राम जन्म भूमि विवाद पर फैसले को चिंता का मुद्दा बताया गया है।
OIC की स्थापना मोरक्को के रबात, में 25 सितंबर,1969 को हुए ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के निर्णय के बाद एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में हुई थी। यह संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन है तथा इसके सदस्य देशों की संख्या 57 है।

यह विश्व के विभिन्न लोगों के बीच अंतर्राष्ट्रीय शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने की भावना से मुस्लिम जगत के हितों की रक्षा तथा संरक्षण का प्रयास करता है। OIC के पास संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के स्थायी प्रतिनिधिमंडल हैं। इसका प्रशासनिक केंद्र (मुख्यालय) जेद्दा,सऊदी अरब में स्थित है।

भारत,OIC का सदस्य देश नहीं है।

पहली बार मार्च 2019 में OIC ने भारत को 'गेस्ट ऑफ़ ऑनर' के तौर पर विदेशमंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिये आमंत्रित किया था

पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान OIC के संस्थापक सदस्य देश हैं।
  • पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) द्वारा जारी विश्व तेल आउटलुक-2019 (World Oil Outlook-2019) के अनुसार, वर्ष 2024 तक कच्चे तेल और अन्य तरल पदार्थों के उत्पादन में प्रति दिन 32.8 मिलियन बैरल की कमी आने की आशंका है।
OPEC 14 तेल निर्यातक विकासशील राष्ट्रों का एक स्थायी, अंतर सरकारी संगठन है।

इसका गठन 10-14 सितंबर, 1960 में आयोजित बगदाद सम्मेलन में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेज़ुएला द्वारा किया गया था। इन पाँच संस्थापक सदस्यों के अलावा कुछ अन्य सदस्यों को इसमें शामिल किया गया है। ये देश हैं- क़तर (1961), लीबिया (1962), संयुक्त अरब अमीरात (1967), अल्जीरिया (1969), नाइजीरिया (1971), इक्वाडोर (1973), अंगोला (2007), गैबन (1975), इक्वेटोरियल गिनी (2017) और कांगो (2018) जनवरी 2019 में क़तर ओपेक से अलग हो गया, अतः वर्तमान में इसके सदस्य देशों की संख्या 14 है। OPEC के अस्तित्व में आने के बाद शुरुआत में पाँच वर्षों तक इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में था। 1 सितंबर, 1965 को इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना में स्थानांतरित कर दिया गया। भारत OPEC का सदस्य देश नहीं है। ओपेक प्लस (OPEC PLUS) कुछ विश्लेषक, गैर ओपेक देश जो पेट्रोलियम पदार्थों का उत्पादन करते हैं, ऐसे देशों के समूह को ओपेक प्लस कहते हैं। ओपेक प्लस देशों की श्रेणी में अज़रबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, कज़ाकस्तान, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान, रूस, दक्षिण सूडान और सूडान शामिल हैं।

  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष को पूर्व में संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष के नाम से जाना जाता था।

इस कोष की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) द्वारा वर्ष 1946 में की गई थी। इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित है। यह संयुक्त राष्ट्र (United Nations -UN) का एक विशेष कार्यक्रम है जो बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और कल्याण में सुधार के लिये सहायता प्रदान करने हेतु समर्पित है।

  • UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो विश्व के सागरों और महासागरों पर देशों के अधिकार एवं ज़िम्मेदारियों का निर्धारण करता है तथा समुद्री साधनों के प्रयोग के लिये नियमों की स्थापना करता है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस कानून को वर्ष 1982 में अपनाया था लेकिन यह नवंबर 1994 में प्रभाव में आया।
भारत ने वर्ष 1995 में UNCLOS को अपनाया, इसके तहत समुद्र के संसाधनों को तीन क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है- आंतरिक जल (IW), प्रादेशिक सागर (TS) और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ)।
  • ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम की स्थापना रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा वर्ष 2015 में की गई थी। इस फोरम की बैठक प्रत्येक वर्ष रूस के शहर व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) में आयोजित की जाती है। यह फोरम विश्व अर्थव्यवस्था के प्रमुख मुद्दों, क्षेत्रीय एकीकरण, औद्योगिक तथा तकनीकी क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ रूस और अन्य देशों के सामने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिये एक मंच के रूप में कार्य करता है। यह रूस और एशिया प्रशांत के देशों बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को विकसित करने की रणनीति पर चर्चा करने के लिये एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा है। इस फोरम का मुख्यालय व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) में स्थित है।
  • भू-वैज्ञानिक विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय संघ(International Union of Geological Sciences- IUGS)

यह एक वैश्विक संघ है जिसका गठन वर्ष 1961 में किया गया था। इस संघ का उद्देश्य प्रासंगिक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से पृथ्वी विज्ञान के विकास को बढ़ावा देना है। इसके प्रमुख कार्य हैं: पृथ्वी के प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण के लिये अध्ययनों के परिणामों को लागू करने के लिये सभी प्राकृतिक संसाधनों का बुद्धिमत्तापूर्वक उपयोग करना। देशों की समृद्धि एवं मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना। भू-विज्ञान के संबंध में सार्वजनिक जागरूकता में वृद्धि करना तथा व्यापक अर्थों में भू-वैज्ञानिक शिक्षा को आगे बढ़ाना। वर्तमान में इस संघ में 121 देश शामिल हैं।

  • वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (Financial Action Task Force-FATF) वर्ष 1989 में जी-7 की पहल पर स्थापित एक अंतः सरकारी संस्था है।इस संस्था का उद्देश्य ‘टेरर फंडिंग’, ‘ड्रग्स तस्करी’ और ‘हवाला कारोबार’ पर नज़र रखना है। इसका मुख्यालय फ्राँस के पेरिस में है।

वित्तीय कार्रवाई कार्य-बल किसी देश को निगरानी सूची में डाल सकता है। निगरानी सूची में डाले जाने के बावजूद यदि कोई देश कार्रवाई न करे तो उसे ‘खतरनाक देश’ घोषित कर सकता है।

  • 1985 में फ्राँस में स्थापित FEE ने वर्ष 1987 से यूरोप में अपना कार्य शुरू किया।

ब्लू फ्लैग प्रमाण-पत्र अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक गैर सरकारी संगठन फाउंडेशन फॉर इनवॉयरमेंटल एजूकेशन (Foundation for Environmental Education-FEE) द्वारा प्रदान किया जाता है। हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ‘ब्लू फ्लैग’ प्रमाणन (Blue Flag Certification) के लिये भारत में 12 समुद्र तटों का चयन किया है, इन तटों को स्वच्छता और पर्यावरण अनुकूलता के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

  • 7 अप्रैल, 1948 को स्थापित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मुख्यालय जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में अवस्थित है। WHO संयुक्त राष्ट्र विकास समूह (United Nations Development Group) का सदस्य है। इसकी पूर्ववर्ती संस्था ‘स्वास्थ्य संगठन’ लीग ऑफ नेशंस की एजेंसी थी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) संयुक्त राष्ट्र संघ की एक विशेष एजेंसी है, जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) को बढ़ावा देना है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (Stockholm International Peace Research Institute-SIPRI) वर्ष 1966 में स्थापित एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है। यह प्रतिवर्ष अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।यह संस्थान युद्ध तथा संघर्ष, युद्धक सामग्री, शस्त्र नियंत्रण और निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में शोध कार्य करता है। साथ ही नीति निर्माताओं, शोधकर्त्ताओं, मीडिया द्वारा जानकारी मांगे जाने पर इच्छुक लोगों को आँकड़ों से संबंधित विश्लेषण और सुझाव भी उपलब्ध कराता है। इसका मुख्यालय स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में है और इसे विश्व के सर्वाधिक सम्मानित थिंक टैंकों की सूची में शामिल किया जाता है।

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization-NATO) वर्ष 1949 में स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है। इस संगठन में अमेरिका तथा यूरोप के सभी प्रमुख देश शामिल है वर्तमान में इसके 29 राज्य सदस्य हैं।इसका मुख्यालय बेल्यज़िम के ब्रुसेल्स में अवस्थित है।

सेंट पीटर्सबर्ग अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मंच (St. Petersburg International Economic Forum-SPIEF) का आयोजन 6-8 जून, 2019 को किया गया। इस फोरम में भाग लेकर भारत ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि परंपरागत रक्षा, ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्रों की जगह स्टार्ट-अप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता,विनिर्माण,डिजिटलीकरण,भारत-रूस आर्थिक सहयोग और विकास के कारक बनने चाहिये। यह अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत हेतु एक अद्वितीय मंच है। इस मंच की शुरुआत वर्ष 1997 में की गई थी और वर्ष 2006 से यह रूस के राष्ट्रपति के नेतृत्त्व में आयोजित किया जा रहा है। यह व्यापारिक समुदाय के प्रतिनिधियों के आपसी संपर्क के लिये तथा उभरती हुई आर्थिक शक्तियों, रूस व पूरे विश्व के समक्ष खड़े महत्त्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के लिये एक अग्रणी वैश्विक मंच है।


शंघाई सहयोग संगठन(SCO)

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की 19वीं शिखर बैठक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 13 व 14 जून, 2019 को संपन्न हुई। 15 जून,2001 को शंघाई में स्थापित,एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।यह एक यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है,जिसका उद्देश्य संबंधित क्षेत्र में शांति, सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखना है।SCO चार्टर पर वर्ष 2002 में हस्ताक्षर किए गए थे और यह वर्ष 2003 में लागू हुआ। यह चार्टर एक संवैधानिक दस्तावेज है जो संगठन के लक्ष्यों व सिद्धांतों आदि के साथ इसकी संरचना तथा प्रमुख गतिविधियों को रेखांकित करता है।

वर्ष 2004 में SCO के शिखर सम्मेलन में स्थापितक्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti Terror Structure-RATS)SCO का एक महत्त्वपूर्ण तथा स्थायी अंग है, जिसका मुख्यालय उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में स्थित है।इसका कार्य सदस्य देशों के मध्य आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद से लड़ने के लिये आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है।

रूसी और चीनी SCO की आधिकारिक भाषाएँ हैं।
गठन
  • वर्ष 2001 में SCO की स्थापना से पूर्व कज़ाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान ‘शंघाई-5’ नामक संगठन के सदस्य थे।
  • वर्ष 1996 में ‘शंघाई-5’ का गठन विसैन्यीकरण वार्ता की श्रृंखलाओं से हुआ था, जो चीन के साथ चार पूर्व सोवियत गणराज्यों ने सीमाओं पर स्थिरता के लिये किया था।
  • वर्ष 2001 में उज़्बेकिस्तान के संगठन में प्रवेश के बाद ‘शंघाई-5’ को SCO नाम दिया गया।
  • वर्ष 2017 में भारत तथा पाकिस्तान को इसके सदस्य का दर्जा मिला।

पर्यवेक्षक देश-अफगानिस्तान,बेलारूस,ईरानऔर मंगोलिया

वर्ष 1949 में स्थापित उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization-NATO) एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना में की गई थी।इस संगठन में अमेरिका तथा यूरोप के सभी प्रमुख देश शामिल है वर्तमान में इसके 29 राज्य सदस्य हैं। इसका मुख्यालय बेल्यज़िम के ब्रुसेल्स में अवस्थित है।

व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि संगठन(Comprehensive Nuclear Test Ban Treaty Organization- CTBTO) ने भारत को पर्यवेक्षक सदस्य बनने के लिये आमंत्रित किया है।

परमाणु अप्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty- NPT)-परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु टेक्नोलॉजी के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है। इस संधि की घोषणा 1970 में की गई थी। अब तक संयुक्त राष्ट्र संघ के 191 सदस्य देश इसके पक्ष में हैं। इस पर हस्ताक्षर करने वाले देश भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकते। हालाँकि, वे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसकी निगरानी अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency-IAEA) के पर्यवेक्षक करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UN Convention on the Law of the Sea-UNCLOS)एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो विश्व के सागरों और महासागरों पर देशों के अधिकार और ज़िम्मेदारियों का निर्धारण करती है और समुद्री साधनों के प्रयोग के लिये नियमों की स्थापना करती है। संयुक्त राष्ट्र ने इस कानून को वर्ष 1982 में अपनाया था लेकिन यह नवंबर 1994 में प्रभाव में आया। उस समय यह अमेरिका की भागीदारी के बिना ही प्रभावी हुआ था। संधि के प्रमुख प्रावधान: क्षेत्रीय समुद्र के लिये 12 नॉटिकल मील सीमा का निर्धारण। अंतर्राष्ट्रीय जलडमरूमध्य के माध्यम से पारगमन की सुविधा। द्वीपसमूह और स्थलबद्ध देशों के अधिकारों में वृद्धि। तटवर्ती देशों हेतु 200 नॉटिकल मील EEZ (Exclusive Economic Zone) का निर्धारण। राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर गहरे समुद्री क्षेत्र में खनिज संसाधनों के दोहन की व्यवस्था।

अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण बोर्ड हाल ही में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (United Nations Economic and Social Council) ने भारत की जगजीत पवाड़िया को अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण बोर्ड (International Drug Control Board) के लिये एक बार फिर निर्वाचित किया है। जगजीत पवाड़िया का यह दूसरा कार्यकाल है जो 02 मार्च, 2020 से 01 मार्च, 2025 तक होगा। उनका मौजूदा कार्यकाल वर्ष 2020 में समाप्त होना तय था। अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण बोर्ड एक अर्द्ध-न्यायिक निकाय है, यह नशीली दवाओं पर लगे प्रतिबंधों से जुड़े मामले देखता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1909 में शंघाई में अंतर्राष्ट्रीय अफीम आयोग के साथ हुई थी। इसमें 13 सदस्य शामिल हैं। इसका मौजूदा स्वरुप वर्ष 1968 में सामने आया। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक तथा सामाजिक परिषद (ECOSOC) संयुक्त राष्ट्र संघ के कुछ सदस्य राष्ट्रों का एक समूह है। यह परिषद महासभा को अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग और विकास कार्यक्रमों में मदद करती है। यह परिषद सामाजिक समस्याओं के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति को प्रभावी बनाने का कोशिश करती है। ECOSOC की स्थापना वर्ष 1945 की गई थी। इस परिषद में प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।


भारत का चुनाव पुन:आर्कटिक परिषद में पर्यवेक्षक के रूप में। आर्कटिक परिषद एक उच्च-स्तरीय अंतर-सरकारी फोरम है। इसकी स्थापना वर्ष 1996 में ओटावा घोषणा के तहत आर्कटिक देशों के मध्य सहयोग, समन्वय और बातचीत को बढ़ावा देने के लिये की गई थी। आर्कटिक के आस पास स्थित देश इसके सदस्य हैं इसके सदस्य देशों में रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, आइसलैंड और फिनलैंड शामिल हैं। पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्ज़ा चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, इटली और जापान को परिषद में पर्यवेक्षक का दर्ज़ा प्राप्त है। भारत को पर्यवेक्षक का दर्ज़ा किरुना घोषणा के माध्यम से दिया गया है। पर्यवेक्षकों को सक्रिय बैठकों में भाग लेने की अनुमति नहीं है। वे आमतौर पर साइड इवेंट में भाग लेते हैं। आर्कटिक परिषद में पर्यवेक्षक का दर्ज़ा गैर-सरकारी संगठनों के साथ अंतर-सरकारी और अंतर-संसदीय संगठनों के लिए खुला है।
रेड क्रॉस दिवस प्रतिवर्ष 8 मई को इसके संस्थापक और पहले नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता हेनरी ड्यूनैंट के जन्म दिवस पर मनाया जाता है।इस वर्ष इसकी थीम ‘#Love’ है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (International Federation of Red Cross and Red Crescent Societies) रेड क्रॉस एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका उद्देश्य मानव जीवन व स्वास्थ्य का बचाव करना है। इसकी स्थापना युद्ध भूमि पर जख्मी और पीडि़तों को सहायता प्रदान करने के लिये वर्ष 1863 में हेनरी ड्यूनैंट ने जिनेवा में की थी। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है। इसे तीन बार (वर्ष 1917,1944 और 1963) नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त हुआ है।मुख्य उद्देश्य युद्ध या विपदा के समय में कठिनाइयों से राहत दिलाना है। रेड क्रॉस ने मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वयं प्रेरित सेवा, एकता एवं सार्वभौमिकता के सिद्धांतों को आत्मसात किया है। भारतीय रेड क्रॉस का सोसायटी अधिनियम, 1920 में पारित किया गया है जो शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, रोगों को रोकने और पीड़ितोंको सहायता प्रदान करने पर बल देता है।


इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एथलेटिक्स फेडरेशन्स (International Association of Athletics Federations- IAAF),स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में 17 जुलाई, 1912 में स्थापित गई थी। इसका मुख्यालय मोनाको में है। उस समय इसका नाम अंतर्राष्ट्रीय एमेच्योर एथलेटिक महासंघ (International Amateur Athletic Federation- IAAF) था। 2001 में इसका नाम बदलकर वर्तमान नामकरण किया गया। द कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट एक अंतर्राष्ट्रीय अर्द्ध-न्यायिक निकाय है। यह खेल संबंधित विवादों के निपटान हेतु एक मध्यस्थ निकाय है। इसका मुख्यालय लुसाने (स्विट्ज़रलैंड) में है। इसके अन्य न्यायालय न्यूयॉर्क शहर और सिडनी में स्थित हैं।


राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल (CHRI)एक स्वतंत्र,गैर-पक्षपातपूर्ण,अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है इसमें 53 स्वतंत्र और संप्रभु राज्य शामिल हैं।इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह दुनिया के राज्यों के सबसे पुराने राजनीतिक संगठनों में से एक है इसकी जड़ें ब्रिटिश साम्राज्य में हैं जब कुछ देशों पर ब्रिटेन द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शासन किया गया। 1949 में राष्ट्रमंडल अस्तित्व में आया और तब से अफ्रीका, अमेरिका, एशिया, यूरोप तथा प्रशांत महासागर क्षेत्र के स्वतंत्र देश राष्ट्रमंडल में शामिल होते गए।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) 1966 में स्टॉकहोम में स्थित एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है जो संघर्ष,आयुध,हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण में अनुसंधान के लिये समर्पित है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) नीति निर्माताओं, शोधकर्त्ताओं, मीडिया और इच्छुक जनता के लिये खुले स्रोतों के आधार पर आँकड़े एकत्र कर उनका विश्लेषण और सिफारिशें प्रदान करता है। उद्देश्य-एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना है जिसमें असुरक्षा के स्रोतों को पहचाना और समझा जाए, संघर्षों को रोका या हल किया जाए और शांति बनाए रखी जाए।

रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर (Regional Anti-Terrorist Structure-RATS) शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का एक स्थायी अंग है। यह आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सदस्य देशों के सहयोग को बढ़ावा देने का काम करता है। इसका मुख्यालय ताशकंद (Tashkent) में है।शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसकी स्थापना 2001 में शंघाई (चीन) में की गई थी। वर्तमान में इसमें 8 सदस्य हैं।SCO का मुख्यालय बीजिंग (चीन) में स्थित है। SCO की उत्पत्ति 26 अप्रैल, 1996 को स्थापित ‘शंघाई फाइव’ समूह के देशों- चीन, कज़ाखस्तान, रूस, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान से मिलकर हुई थी।
1975 में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) विकासशील देशों में गरीबी, भूख और कुपोषण को कम करने के लिये अनुसंधान आधारित नीतिगत समाधान प्रदान करता है। वर्तमान में 50 से अधिक देशों में काम करने वाले 600 से अधिक कर्मचारी हैं। यह CGIAR (Consultative Group for International Agricultural Research) का एक अनुसंधान केंद्र है। CGIAR एक वैश्विक साझेदारी है जो खाद्य-सुरक्षित भविष्य (Food-secured Future) के लिये अनुसंधान में लगे संगठनों को एकजुट करती है। CGIAR अनुसंधान ग्रामीण गरीबी को कम करने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने, मानव स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करने और प्राकृतिक संसाधनों के स्थायी प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिये समर्पित है।

‘एशियन टी अलायंस’ (Asian Tea Alliance-ATA)का गठन चीन के गुइझोउमें किया गया।चाय का उत्पादन और खपत करने वाले पाँच देशों के संघ ने गया। इस अलायंस में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं- ♦ भारतीय चाय संघ ♦ चीन चाय विपणन संघ ♦ इंडोनेशियाई चाय विपणन संघ ♦ श्रीलंका चाय बोर्ड ♦ जापान चाय एसोसिएशन एशियन टी अलायंस का उद्देश्य चाय व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर चाय को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना है। भारतीय चाय संघ और चीन चाय विपणन संघ ने दिसंबर 2018 में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे जिसके पश्चात् यह अलायंस अस्तित्व में आया है। दोनों संघों ने भारत और चीन के अलावा यूरोप, अमेरिका, रूस तथा पश्चिम एशिया के प्रमुख चाय बाज़ारों में ग्रीन और ब्लैक टी की खपत को बढ़ावा देने के लिये समझौते पर हस्ताक्षर किये थे।


भारतीय मौसम विज्ञान विभाग(IMD)वर्ष 1875 में स्थापित पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Science- MoES) की एक एजेंसी है। यह मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिये ज़िम्मेदार प्रमुख एजेंसी है।


हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (Indian Ocean Rim Association- IORA) 7 मार्च, 1997 को स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है।इसमें 21 सदस्य देश शामिल हैं जो कि मुख्यत: हिंद महासागर क्षेत्र के राष्ट्र हैं,इसके अलावा इसमें 7 अन्य राष्ट्र भी शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International Telecommunications Union-ITU) जेनेवा (स्विट्जरलैंड) स्थित संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है। यह संयुक्त राष्ट्र विकास समूह (United Nations Development Group) का भी सदस्य है। पूरे विश्व में ITU के 12 क्षेत्रीय कार्यालय हैं। भारत को एक और बार 4 वर्षों (2019 -2022) के कार्यकाल के लिये ITU काउंसिल के सदस्य के रूप में चुना गया है। भारत 1952 से ITU का एक नियमित सदस्य बना हुआ है।

अंतर्राष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति कपास का उत्पादन, खपत और व्यापार करने वाले सदस्य देशों का एक संघ है। इसका मुख्यालय वाशिंगटन DC,अमेरिका में है। भारत 1939 से इस समूह के 27 सदस्यों में से एक है।

अंतर्राष्ट्रीय एकीकृत पर्वत विकास केंद्र (ICIMOD) एक क्षेत्रीय अंतर सरकारी शिक्षण और ज्ञान साझाकरण केंद्र है। जिसका उद्देश्य पर्वतीय लोगों को पर्वतों पर होने वाले परिवर्तनों को समझने, उनके अनुकूल बनने और उतार-चढ़ाव संबधी मुद्दों को समझते हुए नए अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने में सहायता करना है। हिंदू कुश हिमालय के आठ क्षेत्रीय सदस्य देश हैं - अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, म्याँमार, नेपाल और पाकिस्तान

इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है। इसे अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन (शिकागो कन्वेंशन) पर कन्वेंशन के प्रशासन और शासन का प्रबंधन करने के लिये 1944 में स्थापित किया गया था। भारत ने 1 मार्च 1947 को इस सम्मेलन की मंज़ूरी दी थी।

  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) एक स्वायत्त संगठन है, जो अपने 30 सदस्य देशों, 8 संघ देशों और अन्य देशों के लिये विश्वसनीय, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करने का काम करती है।

भारत वर्ष 2017 में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का सहयोगी सदस्य बना।

  • 1975 में स्थापित परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (NSG)48 परमाणु आपूर्तिकर्त्ता देशोंका समूह है।परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की आपूर्ति से लेकर नियंत्रण तक इसी के दायरे में आता है।भारत में इस समय परमाणु संयंत्र लगाए जाने का काम तेज़ी से चल रहा है। भारत सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि उसका उद्देश्य बिजली तैयार करना है और NSG की सदस्यता मिलने से उसकी राह आसान हो जाएगी। लेकिन NSG की सदस्यता के लिये भारत को कई शर्तों को भी मंज़ूर करना होगा, जैसे कि परमाणु परीक्षण न करना आदि।

जिसका उद्देश्य परमाणु निर्यात और परमाणु-संबंधित निर्यात के लिए दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन के माध्यम से परमाणु हथियारों के अप्रसार में योगदान करना है। इस समूह में 48 देशों की सरकारें शामिल हैं और यूरोपीय आयोग इसके पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करता है। भारत NSG का सदस्य नहीं है। परमाणु अप्रसार संधि (Treaty on the Non-Proliferation of Nuclear Weapons-NPT) एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों और इन हथियारों की तकनीक के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और निरस्त्रीकरण (Disarmament) के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है। NPT परमाणु हथियार संपन्न देशों द्वारा निरस्त्रीकरण के लक्ष्य के लिये बहुपक्षीय संधि के रूप में यह एकमात्र बाध्यकारी प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है।

  • अंतर्राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन 1921 में नौवहन की सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा का समर्थन करने के लिये स्थापित एक अंतर-सरकारी परामर्शदात्री और तकनीकी संगठन।
  • भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन का सदस्य है|
  • SAFTA, दक्षिण एशिया अधिमान्य व्यापार समझौते (South Asia Preferential Trade Agreement-SAPTA) को प्रतिस्थापित करता है।

दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार समझौता (SAFTA) उन सात दक्षिण एशियाई देशों के मध्य हुआ था, जो दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) का गठन करते है। इसमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य सार्क (SAARC) सदस्यों के बीच क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने हेतु शुल्कों को कम करना है। राष्ट्रमंडल सचिवालय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (CSAT) लंदन, यूनाइटेड किंगडम में स्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी और यह अपने 53 सदस्य देशों के बीच विवाद की स्थिति में मध्यस्थ की भूमिका निभाता है।

  • अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (Programme for International Students Assessment-PISA) आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) द्वारा समन्वित अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण है जो संयुक्त राज्य अमेरिका में शैक्षिक सांख्यिकी के लिये राष्ट्रीय केंद्र (NCES) द्वारा प्रति तीन वर्ष की अवधि पर आयोजित किया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (PISA) का आयोजन पहली बार वर्ष 2000 में किया गया था। PISA सामग्री-आधारित मूल्यांकन के विपरीत एक सक्षमता-आधारित मूल्यांकन है, जो यह मापता है कि छात्र प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा द्वारा अर्जित ज्ञान का अनुप्रयोग करने में सक्षम हैं या नहीं जो कि आधुनिक समाज में पूर्ण भागीदारी के लिये आवश्यक है। यह एक योग्यता-आधारित परीक्षण है, जो 15 वर्षीय उम्मीदवारों द्वारा वास्तविक जीवन में अपने ज्ञान का उपयोग करने की क्षमता का आकलन करने के लिये डिज़ाइन किया गया है। इसमें दुनिया भर की शैक्षिक प्रणाली की गुणवत्ता का आकलन विज्ञान, गणित और पठन संबंधी क्षेत्रों में छात्रों का मूल्यांकन करके किया जाता है।

  • विश्व चुंबकीय मॉडल (World Magnetic Model-WMM) कोर और बड़े पैमाने पर क्रस्टल चुंबकीय क्षेत्र (crustal magnetic field) का एक मानक मॉडल है। चुंबकीय मॉडल को हर पाँच साल में अद्यतन किया जाता है, लेकिन अप्रत्याशित बदलाव के कारण इसे 30 जनवरी, 2019 तक रोक दिया गया है।

ये मॉडल BGS द्वारा यूएस नेशनल सेंटर फॉर एनवायरमेंटल डेटा (NCEI) के साथ यूके और यूएस नेशनल जियोस्पेशियल-इंटेलिजेंस एजेंसी में डिफेंस जियोग्राफिक सेंटर से फंडिंग के साथ तैयार किये गए थे।