प्रार्थना/दया कर दान विद्या का

विकिपुस्तक से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ

दया कर दान विद्या का, हमें परमात्मा देना, दया करना हमारी आत्मा में, शुद्धता देना ।

हमारे ध्यान में आओ, प्रभु आँखों में बस जाओ, अँधेरे दिल में आकर के, प्रभु ज्योति जगा देना ।

बहा दो ज्ञान की गंगा, दिलों में प्यार का सागर, हमें आपस में मिल-जुल के, प्रभु रहना सीखा देना ।

हमारा धर्म हो सेवा, हमारा कर्म हो सेवा, सदा ईमान हो सेवा, व सेवक जन बना देना ।

वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना, वतन पर जाँ फिदा करना, प्रभु हमको सीखा देना ।

दया कर दान विद्या का, हमें परमात्मा देना, दया करना हमारी आत्मा में, शुद्धता देना ।