प्रार्थना/माँ शारदे कहाँ तू

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माँ शारदे कहाँ तू,
वीणा बजा रही हैं,
किस मंजु ज्ञान से तू,
जग को लुभा रही हैं ॥

किस भाव में भवानी,
तू मग्न हो रही है,
विनती नहीं हमारी,
क्यों माँ तू सुन रही है ।

हम दीन बाल कब से,
विनती सुना रहें हैं,
चरणों में तेरे माता,
हम सर झुका रहे हैं ।
॥ मां शारदे कहाँ तू, वीणा...॥

अज्ञान तुम हमारा,
माँ शीघ्र दूर कर दो,
द्रुत ज्ञान शुभ्र हम में,
माँ शारदे तू भर दे ।
बालक सभी जगत के,
सूत मात हैं तुम्हारे,
प्राणों से प्रिय है हम,
तेरे पुत्र सब दुलारे,
तेरे पुत्र सब दुलारे ।
॥ मां शारदे कहाँ तू, वीणा...॥

हमको दयामयी तू,
ले गोद में पढ़ाओ,
अमृत जगत का हमको,
माँ ज्ञान का पिलाओ ।
मातेश्वरी तू सुन ले,
सुंदर विनय हमारी,
करके दया तू हर ले,
बाधा जगत की सारी ।
॥ मां शारदे कहाँ तू, वीणा...॥